वंदे मातरम
नमस्कार मेरे साथियों
तेज चिलचिलाती धूप मैं दोपहर को मैं अपनी टैक्सी से उतरकर निजामुद्दीन स्टेशन की और रुख कर रहा था . महाकौशल एक्सप्रेस से मुझे दिल्ली से ग्वालियर जाना था तभी मेरे दोस्त का फोन आया की ट्रेन बहुत ही लेट है .तकरीबन २ घंटे लेट थी मेरी ट्रेन .स्टेशन पर इन्तजार करने से बेहतर मुझे लगा की मैं यहीं आसपास की दिल्ली को घूम सकता हूँ .अपने मन मैं इस विचार को लेकर मैं रिंग रोड की तरफ़ आगे बड़ा . मेरे बायीं तरफ़ एक बहुत ही विशाल और भव्य पार्क था .लोगों से जानने पर पता चला की ये यहाँ का सबसे बड़ा पार्क "इन्द्रप्रस्थ पार्क " है .मैं थोड़ा सा आगे चलकर पार्क के मुख्य प्रवेश द्वार पर पहुँचा की इतने मैं मेरे कुछ साथी भी फोन करके वहां आ गए ।
हम लोगों ने अन्दर प्रवेश किया तो वाकई पार्क बहुत ही हरा भरा और सुन्दर था चारों तरफ हरियाली और प्राकृतिक शौन्दर्य अपनी अनुपम छठा बिखेर रहा था . हम पार्क मैं घूम ही रहे थे की हमारी नजर वहां पर बैठे एक प्रेमी युगल पर पड़ी . वो वहां पर पेड़ की छांव के नीचे कुछ अपने ही अलग अंदाज़ मैं आराम फरमा रहे थे . हम थोडा आगे बड़े तो वहां कई युगल बैठे हुए थे . कुछ पेड़ की झाडियों के पीछे ,कुछ घास मैं , कुछ नीचे की तरफ कुछ कहीं कुछ कहीं .......................
इन युगलों मैं से अधिकांश लड़के लड़कियां एक दुसरे से अश्लील हरकतें कर रहे थे .या कहें तो प्यार की खुलेआम वर्षा कर रहे थे , मैं यहाँ बस यही लिख सकता हूँ की वहां पर जो हो रहा था उसे मैं शब्द नहीं दे सकता इतनी अश्लील हरकतें हो रहीं थी ...
हमने पूरा पार्क घूमा वहां पर हमको न तो कोई बच्चा खेलते हुए दिखाई दिया और न ही कोई बुजुर्ग वहां पर आराम फरमा रहा था ..
अब यहाँ बात आती है की मैं कहीं उन प्रेमी युगलों की निजी स्वतंत्रता तो भंग नहीं कर रहा तो मेरे हिन्दुस्तानी साथियों हम सामाजिक जीवन जीते हैं है जहाँ रिश्तों की , भावनाओं की क़द्र होती है एक सम्मान होता है उसे हम स्वतंत्रता का सही उदाहरण मान सकते हैं नाकि अश्लीलता की वर्षा स्वतंत्रता है .
हमारा जीवन सामाजिक है और सामाजिक जीवन मैं आप ऐसे सार्वजानिक स्थान पर जहाँ कि बच्चे खेलते हो ,बुजुर्ग आराम फरमाते हो , जहाँ प्रकृति का सादगी पूर्ण आनंद लेने लोग आते हैं वहां पर इस प्रकार कि हरकतें खुलेआम होना हमारे समाज कि वर्तमान दिशा बता रहा है कि हमारा समाज किस ओर जा रहा है . अगर आपको प्रेम की खुलेआम वर्षा करनी है तो आप स्वतंत्र हैं मगर आप इस तरह उसे न करे की अक्षय कुमार जी भी अपनी पेंट की बटन को आपके प्यार के तरीके के सामने छोटा महसूस करें .
भाई मैं ये लिख रहा हूँ तो लोग समझते होंगे कि समाज कि दिशा का चिन्तक बनने कि कोसिस कर रहा हूँ तो भाई मेरा इस्ख से सिर्फ इतना उद्देश्य है कि आप अगर सामाजिक प्राणी हैं और अश्लीलता से बचना चाहते हैं तो ............ जरा देख के इन पार्कों कि ओर रुख करना .....
वन्दे मातरम
