वंदे मातरम ,
अज गर्व का विषय है की हमारे देश का प्रख्यात संगीतकार " ऐ आर रहमान " एक नही दो - दो ऑस्कर पुरुस्कार जीत कर हिंदुस्तान के गौरव को बढाया है ।
हमें गर्व है भारत माता के इस पुत्र पर ।
वंदे मातरम
Monday, February 23, 2009
Wednesday, February 18, 2009
होश मैं आओ रेणुका चौधरी तुम भी भारतीय हो
माननीय रेणुका चौधरी जी क्या आप भूल रही हैं की आप भी एक भारतीय नारी हो ,आपकी भी कुछ मर्यादाएं हैं ।
कम से कम आप एक केंद्रीय मंत्री होने के नाते अपनी मर्यादाएं तो निभाइए ,क्योंकि आप सभी भारतीय महिलाओं का नेत्रत्व कर रही हिन् तो कम से कम अपनी नही तो उन महिलाओं की सोचिये जो आपकी ओरदेख रही हैं इस आशा से की कभी आप भी
1.किसी को समान पूर्वक संबोधित करेंगी ।
२.आप माँ -पिता से उनको बच्चों को दूर करने का कानून नही बनायेंगी ।
३.आप किसी को कंस मामा नही कहेंगी ।
४.आप लड़कियों को प्रोत्साहित नही करेंगी खुलकर सरब पीने के लिए ।
५। आप पब अश्लील नृत्य को भारत की संस्कृति से नही जोडेंगी ।
बस आपसे मेरी दरख्वास्त है की आप जरा होश मैं आओ ओर उन लोगों पर कार्यवाही करने की बात करें जो संस्कृति को बचने के लिए हिंसा का मार्ग चुनते हैं।
वंदे मातरम
धन्यवाद
कम से कम आप एक केंद्रीय मंत्री होने के नाते अपनी मर्यादाएं तो निभाइए ,क्योंकि आप सभी भारतीय महिलाओं का नेत्रत्व कर रही हिन् तो कम से कम अपनी नही तो उन महिलाओं की सोचिये जो आपकी ओरदेख रही हैं इस आशा से की कभी आप भी
1.किसी को समान पूर्वक संबोधित करेंगी ।
२.आप माँ -पिता से उनको बच्चों को दूर करने का कानून नही बनायेंगी ।
३.आप किसी को कंस मामा नही कहेंगी ।
४.आप लड़कियों को प्रोत्साहित नही करेंगी खुलकर सरब पीने के लिए ।
५। आप पब अश्लील नृत्य को भारत की संस्कृति से नही जोडेंगी ।
बस आपसे मेरी दरख्वास्त है की आप जरा होश मैं आओ ओर उन लोगों पर कार्यवाही करने की बात करें जो संस्कृति को बचने के लिए हिंसा का मार्ग चुनते हैं।
वंदे मातरम
धन्यवाद
Saturday, February 14, 2009
सभी आम नागरिक करें "श्रीमंत " शब्द का उपयोग
वंदे मातरम
सभी हिन्दुस्तानी साथियों को सादर नमस्कार ,
आज कहा जाए तो हम आजाद है ,हमारे देश मैं प्रजातंत्र है , मगर आज भी देखा जाए , चाहे समाज मैं ,चाहे राजनीती मैं हो या फ़िर अन्य किसी भी क्षेत्र मैं अभी भी सामंत वादी लोग अपनेवर्तमान संसाधनों के बलबूते पर राजा महाराजाओं की तरह जनता से व्यवहार कर रहे हैं ।
आज भी "महाराजा" , "राजा साहब", श्रीमंत जैसे शब्दों का प्रयोग वो किसी संस्कृति की रक्षा हेतु नही बल्कि अपनी सामंतवादी नीतियों को बरक़रार रखने के लिए कर रहे हैं ।
संविधान मैं सम्पूर्ण रूप से लोकतांत्रिक व्यवस्था का उल्लेख है ,मगर इन मुट्ठी भर लोगों ने आज भी लोगों को मानसिक रूप से संसाधनों के प्रभाव से गुलाम बना रखा है और कुछ अपने चाटुकार लोगों को समाज मैं अपनी प्रशंशा हेतु छोड़ रखा है ।
अगर हमें भारत मैं समानता वादी विचार धारा लाना है तो प्रत्येक व्यक्ति को "श्रीमंत "शब्द का उपयोग करना होगा ।
समाज का हर व्यक्ति इस शब्द का उपयोग कर सकता है क्योंकि हमारी सबसे पुराणी और देव भाषा "संस्कृत " मैं "श्रीमंत" शब्द का अर्थ "श्रीमान " होता है और संस्कृत हमारी सबसे प्राचीन भाषा है तो हम इसे सर्वमान्य भी कह सकते हैं ।
हमारे देश मैं किसी भी बात का विरोध होता है तो उस विरोध से लोकप्रियता पाकर उक्त व्यक्ति हीरो हो जाता है और हमारे राजनेता उसे गले लगा लेते हैं
मगर अब हम "श्रीमंत "का विरोध नही समर्थन करते हुए सभी इस "श्रीमंत "शब्द का उपयोग करेंगे ।
जब सभी श्रीमंत होंगे तो जायज है की सभी समानता वादी दृष्टिकोण से एक दुसरे को देखेंगे । आतः आप सभी अपने साथियों को श्रीमंत कहकर ही पुकारें तो इसका प्रभाव जल्दी ही देखने को मिलेगा ।
वंदे मातरम ,
जय हिंद
सभी हिन्दुस्तानी साथियों को सादर नमस्कार ,
आज कहा जाए तो हम आजाद है ,हमारे देश मैं प्रजातंत्र है , मगर आज भी देखा जाए , चाहे समाज मैं ,चाहे राजनीती मैं हो या फ़िर अन्य किसी भी क्षेत्र मैं अभी भी सामंत वादी लोग अपनेवर्तमान संसाधनों के बलबूते पर राजा महाराजाओं की तरह जनता से व्यवहार कर रहे हैं ।
आज भी "महाराजा" , "राजा साहब", श्रीमंत जैसे शब्दों का प्रयोग वो किसी संस्कृति की रक्षा हेतु नही बल्कि अपनी सामंतवादी नीतियों को बरक़रार रखने के लिए कर रहे हैं ।
संविधान मैं सम्पूर्ण रूप से लोकतांत्रिक व्यवस्था का उल्लेख है ,मगर इन मुट्ठी भर लोगों ने आज भी लोगों को मानसिक रूप से संसाधनों के प्रभाव से गुलाम बना रखा है और कुछ अपने चाटुकार लोगों को समाज मैं अपनी प्रशंशा हेतु छोड़ रखा है ।
अगर हमें भारत मैं समानता वादी विचार धारा लाना है तो प्रत्येक व्यक्ति को "श्रीमंत "शब्द का उपयोग करना होगा ।
समाज का हर व्यक्ति इस शब्द का उपयोग कर सकता है क्योंकि हमारी सबसे पुराणी और देव भाषा "संस्कृत " मैं "श्रीमंत" शब्द का अर्थ "श्रीमान " होता है और संस्कृत हमारी सबसे प्राचीन भाषा है तो हम इसे सर्वमान्य भी कह सकते हैं ।
हमारे देश मैं किसी भी बात का विरोध होता है तो उस विरोध से लोकप्रियता पाकर उक्त व्यक्ति हीरो हो जाता है और हमारे राजनेता उसे गले लगा लेते हैं
मगर अब हम "श्रीमंत "का विरोध नही समर्थन करते हुए सभी इस "श्रीमंत "शब्द का उपयोग करेंगे ।
जब सभी श्रीमंत होंगे तो जायज है की सभी समानता वादी दृष्टिकोण से एक दुसरे को देखेंगे । आतः आप सभी अपने साथियों को श्रीमंत कहकर ही पुकारें तो इसका प्रभाव जल्दी ही देखने को मिलेगा ।
वंदे मातरम ,
जय हिंद
Thursday, February 12, 2009
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल मैं है ..........
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल मेंहै, देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है ।
करता नहीं क्यों दुसरा कुछ बातचीत, देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफिल मैं है ।
रहबर राहे मौहब्बत रह न जाना राह मैं , लज्जत -ऐ-सेहरा नवर्दी दूरिये-मंजिल में है ।
यों खड़ा मौकतल में कातिल कह रहा है बार-बार ,क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है ।
ऐ शहीदे-मुल्को-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार ,अब तेरी हिम्मत का चर्चा ग़ैर की महफिल में है ।
वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमां, हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है ।
खींच कर लाई है सब को कत्ल होने की उम्मींद, आशिकों का जमघट आज कूंचे-ऐ-कातिल में है ।
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है ।
है लिये हथियार दुश्मन ताक मे बैठा उधर,और हम तैय्यार हैं सीना लिये अपना इधर,
खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है!
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है!
हाथ जिनमें हो जुनून कटते नही तलवार से, सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से,
और भडकेगा जो शोला सा हमारे दिल में है!
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है!
हम तो घर से निकले ही थे बांधकर सर पे कफ़न, जान हथेली में लिये लो बढ चले हैं ये कदम,
जिंदगी तो अपनी मेहमान मौत की महफ़िल मैं है!
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है!
दिल मे तूफानों की टोली और नसों में इन्कलाब,होश दुश्मन के उडा देंगे हमे रोको न आज,
दूर रह पाये जो हमसे दम कहाँ मंजिल मे है!
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है!
!.........................अमर शहीद पं .राम प्रसाद बिस्मिल जी साहब
करता नहीं क्यों दुसरा कुछ बातचीत, देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफिल मैं है ।
रहबर राहे मौहब्बत रह न जाना राह मैं , लज्जत -ऐ-सेहरा नवर्दी दूरिये-मंजिल में है ।
यों खड़ा मौकतल में कातिल कह रहा है बार-बार ,क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है ।
ऐ शहीदे-मुल्को-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार ,अब तेरी हिम्मत का चर्चा ग़ैर की महफिल में है ।
वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमां, हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है ।
खींच कर लाई है सब को कत्ल होने की उम्मींद, आशिकों का जमघट आज कूंचे-ऐ-कातिल में है ।
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है ।
है लिये हथियार दुश्मन ताक मे बैठा उधर,और हम तैय्यार हैं सीना लिये अपना इधर,
खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है!
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है!
हाथ जिनमें हो जुनून कटते नही तलवार से, सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से,
और भडकेगा जो शोला सा हमारे दिल में है!
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है!
हम तो घर से निकले ही थे बांधकर सर पे कफ़न, जान हथेली में लिये लो बढ चले हैं ये कदम,
जिंदगी तो अपनी मेहमान मौत की महफ़िल मैं है!
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है!
दिल मे तूफानों की टोली और नसों में इन्कलाब,होश दुश्मन के उडा देंगे हमे रोको न आज,
दूर रह पाये जो हमसे दम कहाँ मंजिल मे है!
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है!
!.........................अमर शहीद पं .राम प्रसाद बिस्मिल जी साहब
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