यदि राष्ट्र हित मैं मरना पड़े मुझको सहस्त्रों बार भी ,
तो भी इस कष्ट को निज ध्यान मैं न लाऊँ कभी ।
हे ईश भारत वर्ष मैं शत् बार मेरा जन्म हो ,
हर बार मृत्यु का कारण देशोपकारक कर्म हो ।
पं .रामप्रसाद बिस्मिल जी साहब
Monday, February 9, 2009
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