Saturday, February 14, 2009

सभी आम नागरिक करें "श्रीमंत " शब्द का उपयोग

वंदे मातरम

सभी हिन्दुस्तानी साथियों को सादर नमस्कार ,
आज कहा जाए तो हम आजाद है ,हमारे देश मैं प्रजातंत्र है , मगर आज भी देखा जाए , चाहे समाज मैं ,चाहे राजनीती मैं हो या फ़िर अन्य किसी भी क्षेत्र मैं अभी भी सामंत वादी लोग अपनेवर्तमान संसाधनों के बलबूते पर राजा महाराजाओं की तरह जनता से व्यवहार कर रहे हैं

आज भी "महाराजा" , "राजा साहब", श्रीमंत जैसे शब्दों का प्रयोग वो किसी संस्कृति की रक्षा हेतु नही बल्कि अपनी सामंतवादी नीतियों को बरक़रार रखने के लिए कर रहे हैं ।
संविधान मैं सम्पूर्ण रूप से लोकतांत्रिक व्यवस्था का उल्लेख है ,मगर इन मुट्ठी भर लोगों ने आज भी लोगों को मानसिक रूप से संसाधनों के प्रभाव से गुलाम बना रखा है और कुछ अपने चाटुकार लोगों को समाज मैं अपनी प्रशंशा हेतु छोड़ रखा है ।

अगर हमें भारत मैं समानता वादी विचार धारा लाना है तो प्रत्येक व्यक्ति को "श्रीमंत "शब्द का उपयोग करना होगा ।
समाज का हर व्यक्ति इस शब्द का उपयोग कर सकता है क्योंकि हमारी सबसे पुराणी और देव भाषा "संस्कृत " मैं "श्रीमंत" शब्द का अर्थ "श्रीमान " होता है और संस्कृत हमारी सबसे प्राचीन भाषा है तो हम इसे सर्वमान्य भी कह सकते हैं ।

हमारे देश मैं किसी भी बात का विरोध होता है तो उस विरोध से लोकप्रियता पाकर उक्त व्यक्ति हीरो हो जाता है और हमारे राजनेता उसे गले लगा लेते हैं
मगर अब हम "श्रीमंत "का विरोध नही समर्थन करते हुए सभी इस "श्रीमंत "शब्द का उपयोग करेंगे ।
जब सभी श्रीमंत होंगे तो जायज है की सभी समानता वादी दृष्टिकोण से एक दुसरे को देखेंगे । आतः आप सभी अपने साथियों को श्रीमंत कहकर ही पुकारें तो इसका प्रभाव जल्दी ही देखने को मिलेगा ।

वंदे मातरम ,
जय हिंद



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