Friday, April 3, 2009

हत्या संपादक की नही , अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की हुयी है

वंदे मातरम




नमस्कार हिन्दुस्तानी साथियों




पिछले दिनों आपने एक बहुत महत्वपूर्ण ख़बर सुनी होगी की "असम मैं एक संपादक की हत्या "। असम मैं "असमिया" भाषा के दैनिक अखबार "आजि "ke संपादक श्री अनिल मजुमदार जी की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई । दरअसल देखा जाए तो ये हत्या संपादक महोदय की नही बल्कि भारतीय संविधान के उस अधिकार की है जिसे हम "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार "कहते हैं । श्री मजुमदार उन दिनों सरकार और उल्फा की बातचीत के पक्ष मैं लिख रहे थे । मजुमदार जी जब शाम को कार्यालय से लौटकर घर पहुंचे तो सात लोगों के समूह ने उन्हें रोककर और उनको गोलियों से भून दिया ।









आज अगर देखा जाए तो देश जिन परिस्थियों से गुजर रहा है उसमें हम तक सच्चाई और घटना क्रम की जानकारी का पहुंचाकर हमको सचेत करता है वह है हमारे लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ मीडिया .ऐसे मैं जब अकेले असम मैं ही जब ६ वर्षों मैं २२ पत्रकारों की हत्या हो चुकी है तो हम कहाँ तक अपने लोकतंत्र को सुरक्षित समझते हैं ।









अगर नेताजी को कोई भी धमकी क्या दे देता है उसको "जेड प्लस " सुरक्षा प्रदान कर दी जाती है । लेकिन पत्रकारों की हत्याएं हो रहीं है ,देश मैं आए दिन चाहे जहाँ बम ब्लास्ट हो जाते हैं सैकड़ों निर्दोष आम नागरिक मारे जाते हैं ,आजाद भारत मैं उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी ?सीमा पर अपनी जिंदगी देश की suraksha करते हुए bita चुके जवान अपने पदक वापस कर रहे हैं । अगर कलम के सिपाही इसी तरह मारे जाते रहेंगे तो कुछ नेक दिल और बहादुर तहरीर ऐ जवान बचे हैं वो भी धीरे धीरे समाप्त होते जायेंगे । मगर मैं प्रणाम करता हूँ मजुमदार जी को की उन्होंने जान कुर्बान कर दी मगर ईमान नहीं ।









हम भारत के नागरिक हैं हमें ये समझ लेना चहिये की चाहे आतंक वाद हो ,नक्सलवाद हो या भी क्षेत्रीय अपराधीकरण हो ,तस्करी हो या फ़िर घुसपैठ ये हमारे गंदे राजनेताओं की गन्दी सोच और कर्मो के karan बढ रहे हैं । हम इससे मुक्त नही हो पा रहे हैं, पत्रकार तक सुरक्षित नही हैं तो आम आदमी कितना सुरक्षित है आप सब समझते हैं ?हमारी कमजोर राजनितिक इच्छाशक्ति से हमने निजात नही पाई और इसी प्रकार से " अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता "की हत्या होती रही तो वह दिन दूर नही जब ये देश vinash के कगार पर पहुँच जाएगा ।




मजुमदार जी को सलाम .......

3 comments:

राहुल यादव said...

dost mudda achchha hai, par lekh me netao ki tarah bhashdbaaji jyada jaan pad rahi hai..lekin aapki soch behter hai....

राहुल यादव said...

dost mudda achchha hai, par lekh me netao ki tarah bhashdbaaji jyada jaan pad rahi hai..lekin aapki soch behter hai....

www.जीवन के अनुभव said...

vaakai aapka blog pad kar achcha laga. aapki lekhani ne desh prem aur josh dono hi dikhai padate hai jo aaj k yuva varg k liye bahut jaruri hai.