Sunday, March 22, 2009

कल क्या है ?पता नहीं !.........शहीद दिवस पर आज का युवा

वंदे मातरम
छात्रों के एक समूह को चौराहे के पास खड़ा देखकर उनके बीच जाने का मन हुआ। जब मैं पहुँचा तो देखा कि पार्टियों के प्रचार और बालीवुड के सितारों की कामयाबी की चर्चा कर रहे छात्रों को देखकर थोडी सी हैरानी हुई । मन नही मानाऔर मैंने पूछा की भईया आप लोग चर्चा बहुत कर रहे हैं आप बताएं की कल २३ मार्च को कौन सा विशेष दिन है । उन्होंने सोचा और बोले न किस डे है , न चोकलेट डे है , न हृतिक का जन्म दिन है ..........वे बोले की भईया हमें नही पता कि कल क्या है । मैंने पूछा की १४ फरबरी को क्या???? कह भी नही पाया की आवाज आई भईया वेलेंटाइन डे ........ मुझे ज्यादा आश्चर्य नही हुआ क्योंकि यह अक्सर होता है । जब मैं हताश सा हुआ चलने लगा तो उनमें से एक ही सक्श बोला की भईया ये तो बताओ की कल क्या ।
मैंने कहा कि कल "शहीद दिवस "है कल २३ मार्च के ही दिन १९३१ को शहीद-ऐ-आज़म सरदार भगत सिंह साहब जी ,सुखदेव जी और राजगुरु साहब जी को अंग्रेजी सरकार ने फांसी दी थी ।
यह जानकारी जब उन्हें पता चली तो उनको यह जानकर कुछ ज्यादा रोमांचक नही लगा और न ही कोई प्रतिक्रिया मिली और वे वहां से बातें करते हुए निकल गए ।

ये है हमारे लोकतान्त्रिक भारत की वर्तमान आधुनिक तस्वीर । मेरे इस कथन को देश के बड़े बड़े विद्वान यह कहकर भी धता बता सकते हैं की "ये सबका पर्सनल इंट्रस्ट है हमें उन पर इसे थोपना नही चाहिए "। यह उनकी स्वतंत्रता का अधिकार है ।

अगर यह है स्वतंत्रता के मायने तो मैं आज ये भी कहने से नही हिचकूंगा कि आज भी भारत गुलाम है । हमारी मनोवृत्ति गुलाम है । हमारे संस्कार कुंठित हैं । हमारा रक्त लाल नही है । हमारी नैतिकता समाप्त हो गई है ।

आम तौर पर देखा जाए तो ज्यादातर हमारे टी. व्ही .चैनल ,हमारे अख़बार और अन्य सूचना के साधनों पर बड़े जोर शोर से प्रसारित किया जाता है कि आज सलमान का ,आज हृतिक का जन्म दिन है और ये देखिये वो किस तरह से केक कट रहे हैं और ये केक का टुकडा गिर गया । आईये इनके ज्योतिषी को बुलाते हैं और पूछते हैं की केक क्यों गिर गया? कौन सा ग्रह ख़राब है ? यह साल कैसा जाएगा ?

ये वेलेंटाइन डे पर किस तरह प्रेमी प्यार का इजहार कर रहे हैं ... ये राखी ने अपने अपने बॉय फ्रेंड को थप्पड़ मारा......इसकी आवाज सारा देश सुन रहा है ........ये धोनी ने बाल कटवा लिए ......ये राहुल गाँधी गरीब के घर खाना खा रहे हैं ......अरे गजब हो गया , ये हो गया ,वो हो गया इसकी शादी टूट गई ,उसकी शादी हो गई ....ये इसका टॉप खिसक गया उसका कुरता फट गया .......................................
शायद सरदार भगत सिंह ये देख रहे हों तो उन्हें बड़ा ही बुरा लग रहा होगा ..... कि क्या सोचा था कुर्बानी देते वक्त और ये क्या हो रहा है ..........

shaheedon की प्रतिमाये चौराहों पर लगा दी गयीं हैं मगर उन पर पक्षी बीट कर गन्दगी कर रहे हैं ,धूल जम रही है । मगर किसे फिक्र है, किसे याद है की ये भी हमारे लिए कुर्बान हुए थे ।

मैं आधुनिकता के विरोध मैं नही हूँ माँ का मोम हो गया कोई बात नही माताजी का नया नाम ममी/मम्मी हो गया पिताजी का डेड हो गया कोई बात नही ।
दूध की जगह शराब और कोल्ड ड्रिंक्स ने ले ली कोई बात नही सबका अपना स्वास्थ्य है । युवा आधुनिकता की जगह अश्लीलता को अपनानता जा रहा है कोई बात नही आपकी स्वतंत्रता है .....मान मर्यादाएं कुछ नही कम्प्यूटर का युग है चलिए ये भी छोड़ दे ।
मगर ये कतई बर्दास्त नही होता की हम अपने उन शहीदों को भूल जाए जो हमारी पीडी को आजाद कराने के लिए हमसे भी सुंदर स्वस्थ जवानी कुर्बान कर गए । हम उनको भूल गए जो हमारे लिए हंसते हँसते फंसी पर चढ़ गए । अरे हम किस घमंड मैं हैं क्या हम स्वामी विवेकानंद की बराबर विद्वान हैं ,क्या आजाद जी और बिस्मिल साहब ,अशफाक जी की तरह जोशीले हैं । क्या गाँधी जी की बराबर धेर्यवान हैं नही । हम तो कुछ भी नही हैं उनकी महानता के आगे अभी ।

क्या हमरे इतिहास की गलती रही है की हमें कुछ नही सिखाया । या फ़िर हमारे परिवार की । युवा भूल रहे हैं की हम ही संस्कार हैं और हम ही नाकारा नेताओं पर अंकुश लगा सकते हैं तो हम ही ऐसे हो गए तो कौन बचायेगा देश को भेडियों से । उन भेडियों से जो

१.जनरल मानेकशा जैसे देश भक्त सिपाही की अंत्येष्टि मैं नही जा सके और छुट्टियाँ माना रहे थे शिमला मैं ।
२.जो संसद हमले की १३वि वर्षी पर ७०० मैं से पन्द्रह ही श्रधांजलि देने आए मुझे लगा की चुनाव आने वाले हैं नही तो ये १५ भी.......
३.जिनके सामने पदक प्राप्त देश के वीर अपने अपने पदक वापस कर रहे हैं ।
४.जो आतंकवाद मुठभेड़ मैं शहीदों और उनके परिवारों को भी अपनी कलि जुबान से नही बक्शते ।
क्या क्या कहूँ सब जानते हैं आप सब
बस यही कहना चाहूँगा की आधुनिकता के रंगों मैं इतना मत रंग जाओ किअपने शहीदों और वीरों का सम्मान करना भी भूल जाओ क्योंकि तब वो शहीद हुए थे और आज सेनिक ।
वो भी किसी के भाई ,बच्चे ,पति और पिता होते हैं ।
अगर वो अपना कम छोड़ दें तो सोचा है कि क्या होगा ??????????....................................

सोचो और लौट आओ ..इतना दूर मत जाओ कि ख़ुद ही खो जाओ .......
वंदे मातरम
शहीदों को नमन ,
जीवन पुष्प चड़ा चरणों मैं मांगें मातृभूमि से यह वर ,
तेरा वैभव अमर रहे माँ हम दिन चार रहें न रहें ।





3 comments:

दिल दुखता है... said...

सच कहा अपने आज कल के युवा दिशा हीन ही नहीं... बेपरवाह भी हो गए है....
क्या गजब की बातें उठाते हो आप... मान गया.. जरुर आपके ह्रदय में भी जबरदस्त पीडा है... मैं आपके साथ हूँ...साथ ही मैं आपका प्रशंशक भी हूँ...

दिल दुखता है... said...

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media ka falspha said...

रणसा बात तो तेरी एकदम सही है पिछले एक हजार सालो से आपस की फूट और विदेशी आक्रंताओ से लड़ते लड़ते हार और निराशा के के आगोश ने ऐसा जकडा हुआ है के उनके खून में गुलामी का जीन गुसा हुआ है अब जरूरत है इनके जमीर को जखजोरने की ,