Sunday, March 15, 2009

पाकिस्तान मैं लोकतान्त्रिक कदम है नवाज शरीफ का लॉन्ग मार्च

वंदे मातरम
मेरे हिन्दुस्तानी साथियों


आज हमारा पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान जिन हालातों से गुजर रहा है ये हमसे बेहतर शायद वही जानते होंगे जिन पर जुल्मों की मार पड़ रही है । वह है पाकिस्तान का आवाम ।

कई सर्वे और रिपोर्टों मैं यह सामने आया की पाकिस्तान का ७०%से भी अधिक आवाम हिंदुस्तान से मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध चाहता है ।
मगर पाकिस्तान के हुक्मरानों और वहां के इस्लामी ठेकेदारों (ढोंगी) ने जनता की आवाज को कभी भी बुलंद नही होने दिया । हम यह भी नही कह सकते की जनता वहां ऐसे शासक क्यों चुनती है क्योंकि हम हिंदुस्तान मैं भी अच्छे लोगों को चुनने हेतु मतदान करते हैं मगर सभी वहां पहुंचाते ही अपना असली रंग दिखाने लगते हैं ।

इसी प्रकार आज पाकिस्तान की जो हालत है वो भी अपूर्ण लोकतंत्र और जुल्मी तानाशाही का प्रतीक बन गई है । पिछले दिनों से १९४८ से आज तक पाकिस्तान ने हमारे साथ कभी भी मित्रता पूर्ण व्यवहार नही किया बल्कि हमें हमेशा नुकशान पहुँचाया है मगर फ़िर भी पडौसी मुल्क होने के नाते हमें इसकी चिंता करनी चाहिए क्योंकि इसका सीधा प्रभाव हम पर भी पड़ता है ।

aaj पाकिस्तान ,तालिबान और वहां की दुष्ट सेना एवं कुशसकों के हाथ मैं हैं जो वहां पर पहले से ही नष्ट मानवता को निश्तोनाबूत करना चाहते हैं । चाहे swaat ghati हो या दक्षिणी वजिरस्तान हो । चाहे भारत पाक की सीमा हो या कबाइली इलाका या फ़िर पश्तूनी विद्रोह। चाहे मुल्ला रेडियो हो या बेतुल्लाह । मिस्टर १०% जरदारी साहब हो या मुशर्रफ़ के नुमाइंदे कियानी साहब । ये सब वहां पर आतंक का राज चलाना चाहते हैं और इस सब का उद्देश्य हिंदुस्तान मैं तबाही मचाना है क्योंकि इनके इरादों को दुनिया जानती है मगर चुप है।

ऐसी स्थिति मैं अगर देखा जाए तो नवाज़ शरीफ का ये कदम लोकतंत्र की ताकत का प्रदर्शन करेगा जिसे होने से पहले ही दवाया जा रहा है । क्या हमने अपने देश के बारे मैं सोचना बंद कर दिया है या फ़िर हमारी विदेश नीति सिर्फ़ दिखावा है क्योंकि जब पाकिस्तान हमला करे तो हम युद्ध नही कर सकते और जब वहां लोकतंत्र दवाया जाए तो हम ये कह कर टाल देते हैं की यह पाकिस्तान का आंतरिक मामला है। लेकिन साथियों पाकिस्तान का bahri हो या आतंरिक मामला उसका प्रव्हाव सबसे jyada हमारे उपर ही आता है ।
आपने सुना भी होगा ३ दिन पहले की तालिबान हिन्दुस्तानी सीमा तक पहुँच चुका है । इन स्थितियों मैं नवाज शरीफ का ये लॉन्ग मार्च का कदम कारगर साबित हो aisa हम कह सकते हैं। इस कदम को देखकर लगता है की पाकिस्तान आज भी अपने आवाम की आजादी के लिए अपने ही लोगों से लड़ रहा है । अभी हिम्मत बची है उसमें। magar hamari ismain kya bhoomika rahegi ye to वक्त ही batayega .

वंदे मातरम
जय हिंद jai bharat
jai kranti

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