वंदे मातरम
हमारे हिन्दुस्तानी साथियों ,
पिछले दिनों आपने कई जानी मानी हस्तियों की जुबान और लेखन से यह जन होगा की हमारे देश का कितना पैसा "स्विस बैंकों" मैं जमा है । दूसरा आप यह भी जानते होंगे की हमारे देश की ७०% से भी अधिक जनता २० रूपये प्रति दिन की आय मैं अपना गुजारा कर रही है .एक तरफ़ १००००० करोड़ रुपये का मबनी बंधुओं का घर बन रहा है तो दूसरी तरफ़ एशिया की सबसे बड़ी झोंपड़ पट्टी "धारावी" है । पंजाब सरकार कह रही है हमारे यहाँ के गोदामों भरे हुए गेंहू को खाली करवाओ क्योंकि हमको नई फसल रखने के लिए जगह चाहिए और हमारी केन्द्र सरकार अनाज के अभाव मैं आस्ट्रेलिया और अमेरिका से लाल गेंहू खरीद रही है ।
ये तो कुछ छोटे उदाहरण हैं जो आप सभी जानते हैं मगर वास्तव मैं आज देश की स्थिति ऐसी है की अगर हमें अस्तित्व को बचाना है तो सम्पूर्ण क्रांति की राह चलना होगा क्योंकि आज राजनेता से लेकर अधिकारी वर्ग तक , उद्धोगपतियों से लेकर मेनेजर तक सभी का नैतिक पतन हो गया है । जनता को आदत हो गई है इसमें जीने की ।
हिंदुस्तान की सरकार और यहाँ के मध्यम वर्गीय बुद्दिजीविओं की सोच मैं देश मैं बस ३०% संपन्न लोग ही रहते हैं और ७०% लोग शोषण करने के लिए ही होते हैं ।
शिक्चा के खेत्र मैं अगर कोई गरीब किसान का बेटा डाक्टर या इन्जिनेअर बनना चाहे तो कोचिंगों की दिन व् दिन बदती हुयी फीस उसके अरमानों का गला घोंट देती है .जैसे तैसे वह सेलेक्ट होकर कालेज मैं पहुँच जाता है तो वहां की फीस,फाईन ,प्रोजेक्ट फीस , लैब चार्ज वगैरह वगैरह .ये सब इतना होता है की उसे या तो जमीन बेचना पड़ता है या फ़िर लोन । अरे हाँ लोन लेने के लिए भी रिश्वत ।
उसे इतने नियमों मैं बाँध दिया जाता है की वह एक गुलाम की तरह जीने लगता है सही या ग़लत के लिए आवाज उठाने वाली उसकी सोच धीरे धीरे ख़त्म होती जाती है ।
बेचारे को कहीं नामांकन या किसी अन्य कागज के लिए विश्व विद्यालय जन पड़ा तो आप मान ही लीजिये उसकी ख्हैर नही । बस इस खिड़की से उस खिड़की तक चक्कर लगने के कई दिनों बाद कुछ ले दे कर उसका काम होता है ।
अब आप ही बताईये की जिस देश मैं भ्रष्ट चार और असमानताएं शिष्टाचार का रूप ले लें उस देश का नौजवान वैचारिक और स्थिति से शून्य हो जाता है तो वह कीच चीज की जरुरत है ।
मेरे विचार से क्रांति क्रांति और सम्पूर्ण क्रांति की आवश्यकता है देश मैं ।
क्रांति हमारे देवता किसान के लिए खेतों मैं !
.क्रांति शिक्षा के खेत्र मैं !
.क्रांति सुरक्षा हेतु !
.क्रांति नक्सलवाद ,आतंकवाद को हटाने के लिए !
.क्रांति दिमाग मैं राष्ट्र हित हेतु ।
क्या क्या लिखें आप सब जानते हैं मगर ..........................................सब चुप हैं
वंदे मातरम
हे इश्वर इस क्रांति के यज्ञ मैं मेरी आहुति स्वीकार कर
जय हिंद ,
जय हिंदुस्तान
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6 comments:
अरविन्द जी का हिंदी ब्लॉग की दुनिया में स्वागत है...
आप यूथ फॉर एकुँलिटी से है.... कृपया बताएं जरुर...
bahut good, narayan narayan
ब्लॉग की दुनिया में आपका स्वागत है ,मेरी शुभकामनाएं आपके लेखन के लिए ......
aap mujhe apne bol se joden to achaa lagega . aapke sujhav aur prarana ke liye dhanyavaad
shukriya
vande matram
बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्लाग जगत में स्वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
wah wah ji jai hind
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