वंदे मातरम
साथियों ,
आज सुबह पाकिस्तान के इतिहास मैं वो घड़ी गुजर गई जो की इतिहास मैं लिखी जायेगी । आलम बहुत भयावह था । एक ओर संशाधनों से लेस इंसानियत के दुश्मन , दूसरी ओर जनता । पता नही की कितनो को मारा जाएगा । मगर जनता ने जिद पकड़ी , आगे बड़ी ओर सच्चाई के सामने गुनाह झुक गया ।
यही आलम देखने को मिला जब पाक प्रधानमंत्री गिलानी साहब ने जनता की जिद के आगे झुककर अपने निर्णय सुनाये।
अब ये तो वक्त ही बताएगा की ये निर्णय पाकिस्तान मैं किस हद तक लोकतंत्र ओर शान्ति स्थापित कर पाएंगे मगर महात्मा गाँधी के आन्दोलनों की यादें ताजा हो गयीं थी लॉन्ग मार्च का नजारा देखकर ।
पाकिस्तान की जनता ने जिस तरह हर खतरे को सहन करते हुए धारा १४४ को लांघकर सडको पर उतरकर न्याय ओर लोकतंत्र के लिए संघर्ष किया उसका अन्तिम मकसद क्या होगा ये नही कह सकता मगर जनता की जीत हुयी है "जय हो " जनता जनार्दन की । आखिर किसी भी देश का लोकतंत्र वहां की जनता निर्धारित करती है। जब गुनाहगारों ओर इंसानियत के दुश्मन जनता पर ही आत्याचार करने लगते हैं तो उन्हें जनता ही सबक सिखाती है ओर जनतंत्र मैं जनता ही जीतती है । लेकिन अभी इंसानियत के दुश्मनों को सबक सिखाना बाकी रह गया है ।
जय हो जनता की
वंदे मातरम
Monday, March 16, 2009
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