नमस्कार साथियों ,
हमारे देश मैं चाटुकारिता की प्रथा तो कितनी पुराणी है ये आप अच्छी तरह से जानते हैं । आजकल इसका एक जीता जगता रूप संगीत के मध्यम से निकलकर आया है ।
भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस आजकल अपने लोकसभा चुनावों मैं जनता को लुभाने हेतु चुनावी प्रचार प्रसार और जोड़ तोड़ मैं है । सभी पार्टियों की तरह ये भी इन्टरनेट ,संगीत ,बेनर ,रेडियो, टी.व्ही , आदि पर प्रचार जोरों पर है । आप इन सभी पार्टियों के प्रचार के गीत या विडियो देखेंगे तो पाएंगे की इनसे बड़ा राष्ट्र भक्त न तो कोई था और नही हो पायेगा ।
कल जब मैं दूरदर्शन पर समाचार सुन रहा था समाचार समाप्त होने के बाद मैंने अचानक "जय हो" (रहमान साहब की धुन पर गया गया गाना) की धुन सुनी तो मेरा उसे देखने का मन हुआ । मगर वो गाना नही निकला वो तो कोंग्रेस का प्रचार गीत था जो की मंदी मैं भी खूब जोर दिखा रहा था ।
गीत को जब पूरा सुना तो मैं सोचने लगा की इसमें " नेहरू जी क्या सिखाया ,इंदिरा जी ने क्या दिखाया ,राजीब जी ने क्या सुनाया ,और सोनिया जी क्या फार्म चुकी हैं और क्या फरमायेंगी " आदि कुछ था ।
गीत ने प्रचार तो किया मगर चाटुकारिता सिद्ध कर दी की हाँ नेहरू परिवार ही देश और कांग्रेसियों का भाग्य विधाता है । अगर सही रूप मैं कांग्रेस का प्रचार होता तो महात्मा गाँधी, मोलाना अबुल कलाम,सरदार बल्लभ भाई पटेल, शास्त्री जी अवं अनेक देशभक्त कांग्रेसियों का जिक्र भी होता मगर फ़िर चाटुकारिता या कहें तो वास्तविक स्थिति का पता नही चल पता ।
अब आप ही विचार करें की भा.जा.प् .की तरह कर्म कांडी हो चुकी कांग्रेस का रूप कितना खतरनाक और चाटुकार हो गया है .जो की कांग्रेसियों की चाटुकारिता को स्पष्ट करता है ।
अब तो जनता ही बताएगी की वह अभी भी इनकी गुलामी और चाटुकारिता करेगी या नही ।
वंदे मातरम

3 comments:
अरविन्द जी एक बात तो अपने सही कही... की चुनाव आते ही ऐशा लगता है. की इन नेताओ और पार्टियों से बड़ा कोई देश भक्त नहीं है...
ये गीत मैंने भी देखा...!मुझे ऐसे लगा जैसे नेहरु खानदान के अलावा किसी ने भी देश के लिए कुछ नहीं किया है...सच मानो.. मुझे बहुत शर्म आई की ..क्या बाकी सब नेता या शहीद..क्या अपने लिए लड़ते रहे...क्या उनका देश हेतु कोई योगदान नहीं था..?
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